जयंती पर भी बदहाली के आंसू बहा रही शहीद ए आजम भगत सिंह की प्रतिमा
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जयंती पर भी बदहाली के आंसू बहा रही शहीदे आजम भगत सिंह की प्रतिमा, शहीद नगर में टोरेंट बॉक्स और गंदगी से ढका स्मारक
आगरा का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों की गतिविधियों से गहरा जुड़ा रहा है। लेकिन आज वही शहर अपने देश भक्तों के स्मारकों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। 28 सितंबर को अमर शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के पावन अवसर पर आगरा के प्रसिद्ध शहीद नगर चौराहे पर स्थापित उनकी प्रतिमा की जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद निराशाजनक और अफसोसजनक है।
जयंती पर माला तो पहनाई, लेकिन चारों तरफ पसरी बदहाली:
28 सितंबर की सुबह शहीद नगर स्थित मुख्य चौराहे पर भगत सिंह की प्रतिमा पर औपचारिक रूप से फूल-मालाएं चढ़ाई गईं और साफा भी पहनाया गया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रतिमा के आसपास के हालात बेहद जर्जर और दयनीय बने हुए हैं। मुख्य प्रतिमा के ठीक आगे टोरेंट पावर का एक बड़ा और चौड़ा जंक्शन बॉक्स लगा दिया गया है, जिसने प्रतिमा के मुख्य दृश्य को पूरी तरह ढक दिया है। इसके अलावा, चारों ओर लटकते और टूटे हुए बिजली के तार, जर्जर खंभे और गंदगी का ढेर लगा हुआ है।
1928 में आगरा के नूरी दरवाजा में रहे थे भगत सिंह:
इतिहास गवाह है कि वर्ष 1928 के अंत (नवंबर माह) में लाहौर में अंग्रेज अफसर सांडर्स को मार गिराने के बाद भगत सिंह अज्ञातवास के लिए आगरा आए थे। वे आगरा के नूरी दरवाजा स्थित एक मकान में लगभग एक वर्ष तक पहचान छिपाकर रहे थे। यही वह स्थान था जहाँ से भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों ने बम बनाने की तकनीक सीखी और देशव्यापी आंदोलन की रणनीतियां तैयार की थीं। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बावजूद, आगरा में उनके नाम पर बने प्रमुख स्मारक की यह दुर्दशा शहरवासियों को कचोट रही है।
शहरवासियों में गुस्सा, रखरखाव की मांग:
शहीद नगर चौराहे की यह प्रतिमा क्षेत्र की पहचान मानी जाती है, लेकिन शिलान्यास पट्टिका और टोरेंट बॉक्स के पीछे दब जाने के कारण इसका अस्तित्व ही खतरे में दिख रहा है। स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि हर साल 28 सितंबर को औपचारिक रूप से माल्यार्पण कर दिया जाता है, लेकिन वर्षभर स्मारक की सुध नहीं ली जाती। नागरिकों ने नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि बिजली के तारों और टोरेंट बॉक्स को हटाकर शहीद-ए-आजम की प्रतिमा का उचित सौंदर्यीकरण कराया जाए।